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Showing posts from December 22, 2024

माता-पिता की भक्ति

New Post माता-पिता की भक्ति करना हर संतान का सबसे बड़ा कर्तव्य होता है। यह न केवल हमारी संस्कृति और धर्म का हिस्सा है, बल्कि हमारे व्यक्तिगत और आध्यात्मिक विकास के लिए भी महत्वपूर्ण है। माता-पिता ने हमारे जीवन को आकार देने के लिए जो त्याग और मेहनत की है, उसका सम्मान करना और उनकी सेवा करना हमारा धर्म है। 1. सम्मान और आदर: माता-पिता के साथ हमेशा सम्मान से पेश आएं। उनके विचारों और भावनाओं को समझें और उनका आदर करें। 2. समय दें: उनकी खुशी के लिए उनके साथ समय बिताएं। उनसे बात करें, उनकी समस्याओं को सुनें, और उनके अनुभवों से सीखें। 3. सेवा करें: उनकी जरूरतों का ध्यान रखें। यदि वे बुजुर्ग हैं, तो उनकी देखभाल में कोई कमी न होने दें। 4. कृतज्ञता व्यक्त करें: माता-पिता के प्रति आभार व्यक्त करें। उनके द्वारा किए गए हर त्याग और योगदान के लिए उन्हें धन्यवाद दें। 5. धैर्य और सहनशीलता रखें: कभी-कभी माता-पिता उम्र के कारण चिड़चिड़े या कमजोर हो सकते हैं। उनके साथ धैर्यपूर्वक व्यवहार करें। 6. सच्चा जीवन जिएं: अपने कर्मों और व्यवहार से माता-पिता का गर्व बनें। अपने जीवन में अच्छे मूल्यों को अपनाएं और उन्हे...

Mahadev or Sadhak

New Post एक बार एक साधक घोर तपस्या में लीन था, लेकिन उसकी साधना में शांति नहीं थी। वह बार-बार विचलित हो जाता। हताश होकर वह कैलाश पर्वत पर महादेव के पास पहुंचा और प्रार्थना की, "हे भोलेनाथ, मुझे शांति और स्थिरता का मार्ग दिखाइए।" महादेव मुस्कुराए और एक पात्र में जल भरकर साधक को दिया। बोले, "इसे पर्वत की चोटी तक ले जाओ, लेकिन ध्यान रहे, जल की एक भी बूंद गिरनी नहीं चाहिए।" साधक ने पात्र लेकर यात्रा शुरू की। वह पूरे ध्यान से चला, हर कदम सोच-समझकर रखा। चोटी पर पहुँचकर उसने महादेव को पात्र लौटाया। जल एक बूंद भी नहीं गिरा था। महादेव ने पूछा, "यात्रा कैसी रही?" साधक ने उत्तर दिया, "हे महादेव, मेरा पूरा ध्यान केवल पात्र पर था, बाकी सबकुछ भूल गया।" महादेव बोले, "यही ध्यान साधना का मूल है। जब तुम अपने मन को एक लक्ष्य पर केंद्रित करोगे, तो हर बाधा अपने आप दूर हो जाएगी।" साधक को ज्ञान प्राप्त हुआ, और वह सच्ची शांति के मार्ग पर चल पड़ा।

Tulsi (Ocimum sanctum)

New Post वृन्दा तुलसी माता की पौराणिक कथा हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र और महत्त्वपूर्ण है। यह कथा धर्म, भक्ति और सत्य की विजय की प्रेरणा देती है। तुलसी को भगवान विष्णु की प्रिय मानी जाती है, और उनकी पूजा से विशेष पुण्य प्राप्त होता है। जानिए तुलसी पौधाके बारेमें कथा : वृन्दा (तुलसी) एक असुर राजकुमारी थीं और जालंधर नामक शक्तिशाली असुर की पत्नी थीं। जालंधर को उसकी पत्नी वृन्दा की पवित्रता और भक्ति के कारण अपराजेय शक्ति प्राप्त थी। वृन्दा भगवान विष्णु की अनन्य भक्त थीं और उनके तप, सत्य और पतिव्रता धर्म की शक्ति ने जालंधर को अमर बना दिया था। जालंधर ने अपनी शक्ति का उपयोग देवताओं के विरुद्ध किया और संसार में अत्याचार बढ़ा। देवताओं ने भगवान शिव से सहायता मांगी। शिवजी ने जालंधर से युद्ध किया, लेकिन वह वृन्दा की पवित्रता के कारण पराजित नहीं हो सका। तब भगवान विष्णु ने जालंधर को पराजित करने के लिए एक योजना बनाई। उन्होंने जालंधर का रूप धारण कर वृन्दा के समक्ष प्रकट होकर उनकी पतिव्रता धर्म को भंग किया। जब वृन्दा को इस छल का पता चला, तो उन्होंने विष्णु भगवान को श्राप दिया कि वे पत्थर (शालिग्राम) के...

तीन कहानी दर्दभरा

New Post  तीन कहानी दर्दभरा   मर्द का दर्द क्या होता है रघुवीर गांव का एक साधारण किसान था। उसका चेहरा हमेशा धूप से जला हुआ और मेहनत से थका हुआ रहता था। उसकी दिनचर्या सूरज के उगने से पहले शुरू होती और देर रात तक खेतों में खत्म होती। चार लोगों का परिवार उसकी मेहनत पर निर्भर था—बूढ़ी मां, पत्नी और दो बेटियां। रघुवीर हर सुबह अपने हल और बैलों के साथ खेतों की ओर निकल पड़ता। फसल अच्छी हो या खराब, मौसम साथ दे या ना दे, उसके कदम कभी पीछे नहीं हटते थे। उसके गांव में सूखा पड़ा हुआ था। आसमान से बूंद-बूंद बारिश की आस थी, लेकिन बादल भी जैसे उस पर तरस खा रहे थे। एक दिन, घर में राशन खत्म हो गया। बेटियों ने रघुवीर से पूछा, "बाबा, आज खाने में क्या बनेगा?" वह मुस्कुराकर बोला, "आज हम चावल और गुड़ खाएंगे।" लेकिन सच्चाई यह थी कि घर में चावल का एक दाना भी नहीं बचा था। उसने पत्नी से कहा, "तुम बेटियों को बहलाओ, मैं बाजार से कुछ लेकर आता हूं।" रघुवीर जेब में पड़े आखिरी 50 रुपये लेकर गांव के बाजार गया। वहां उसने राशन की दुकान पर आटा, दाल और थोड़ा गुड़ खरीदा। जब पैसे देने की बारी आई,...

Dash Avtaar Rahasya (4)

New Post नरसिंह अवतार की कथा हिंदू धर्म के पुराणों में वर्णित है और यह भगवान विष्णु के दशावतारों में से एक है। यह कथा भक्त प्रह्लाद, दैत्यराज हिरण्यकशिपु और भगवान नरसिंह के रूप में भगवान विष्णु की महिमा का वर्णन करती है। कथा का सारांश दैत्यराज हिरण्यकशिपु, जो एक अत्यंत बलशाली और अहंकारी असुर था, ने कठोर तपस्या करके ब्रह्मा जी से वरदान प्राप्त किया। वरदान के अनुसार: 1. उसे न दिन में मारा जा सकता था और न रात में। 2. न कोई मनुष्य उसे मार सकता था, न कोई देवता और न कोई पशु। 3. न उसे घर के भीतर मारा जा सकता था और न बाहर। 4. न वह किसी अस्त्र से मारा जा सकता था और न किसी शस्त्र से। 5. न आकाश में और न पृथ्वी पर उसका वध हो सकता था। इस वरदान के कारण हिरण्यकशिपु अभिमानी हो गया और स्वयं को भगवान मानने लगा। उसने सभी को अपने अलावा किसी अन्य को पूजने से मना कर दिया। प्रह्लाद की भक्ति हिरण्यकशिपु का पुत्र प्रह्लाद, भगवान विष्णु का परम भक्त था। वह अपने पिता के आदेश के विपरीत, भगवान विष्णु की भक्ति करता था। यह देखकर हिरण्यकशिपु अत्यंत क्रोधित हो गया। उसने प्रह्लाद को समझाने की बहुत कोशिश की, लेकिन प्रह्...

हंसना जरूरी नहीं

New Post RAJU SHRIVASTAVA COMEDY  बॉल फेंका गो गो टॉमी गो  क्या गो गो टेक इट क्यों  गो गो गो अच्छा मर जाओगे इसके  बगैर गो गो टेक इट अच्छा जल्दी लाना  पड़ेगा बाबा खाना यही  खिलाएगा जल्दी से बल लाके दिया करके अब  उसको लगा एक ही बार इसका गेम होगा शायद  बाद में ड़ झाड़ में बॉडी रगड़ रहा है  अचानक फिर फेंका गो जब मंगता है तो फेंकता  क्यों  है डॉग से याद आया अभी एक फिल्म आई है  स्लम  डॉग अब डॉग को देख के हमारे भैया लोग आए  अब स्लम डॉग की स्टोरी सुना रहे  हैं कल सिनिमा देखा रहा ही का कहता का  कुत्ता उत्ता का जो  है अच्छा खेला दिखा रहा हम गए रहे हैं  बैजनाथ संगठ यादव जी हम लोग गए रहे हैं  स्लम डॉक दिखा रहा स्लम डॉक सस्पेंसफुल  फिल्म है सस्पेंस बहुत है नाम रखे स्लम डग  और पूरी फिल्म में कहीं कुत्ता नहीं  दिखाया  मगर ये फिल्म में जो है बाल कलाकार का काम  बढ़िया है बाल कलाकार अरे वही जिनका नाम  अनिल कपूर  है अनिल कपूर बाल कलाकार हां उनके पूरे  शरीर में बाल  है...