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(बेड़ी हनुमान जी: जगन्नाथ पुरी के संरक्षक)
जगन्नाथ पुरी, भारत के चार धामों में से एक, अपने अद्भुत मंदिर और आध्यात्मिक महिमा के लिए विश्व प्रसिद्ध है। इसी पवित्र नगरी में स्थित है "बेड़ी हनुमान" का अनोखा मंदिर। यह मंदिर भगवान हनुमान को समर्पित है, जो अपनी दिव्य शक्ति से समुद्र की प्रचंड लहरों को शांत कर जगन्नाथ मंदिर और पुरी नगरी की रक्षा करते हैं। इस कथा के पीछे एक अद्भुत और प्रेरणादायक कहानी है।
कथा की पृष्ठभूमि
कहते हैं कि अतीत में, जब पुरी में भगवान जगन्नाथ का मंदिर बना, तो समुद्र की लहरें बार-बार बढ़कर मंदिर और शहर को क्षति पहुंचाने लगीं। यह एक गंभीर समस्या बन गई, क्योंकि समुद्र का जल स्तर बढ़ते ही मंदिर की पवित्रता खतरे में पड़ जाती।
राजा और पुजारी सभी इस संकट से परेशान थे। उन्होंने विभिन्न देवी-देवताओं की प्रार्थना की, लेकिन कोई हल नहीं निकला। अंततः, भगवान जगन्नाथ ने स्वप्न में राजा को आदेश दिया कि वे भगवान हनुमान से सहायता मांगें। भगवान ने कहा कि हनुमान जी ही समुद्र को नियंत्रित कर सकते हैं।
हनुमान जी की भूमिका
राजा ने तुरंत हनुमान जी का आह्वान किया। भगवान हनुमान पुरी आए और अपनी शक्ति से समुद्र की लहरों को शांत कर दिया। उन्होंने समुद्र से कहा कि वह जगन्नाथ मंदिर की पवित्रता में बाधा न डाले। समुद्र ने वचन दिया कि वह मंदिर के पास नहीं आएगा।
लेकिन समय बीतने के साथ, समुद्र ने अपना वचन तोड़ दिया और फिर से मंदिर की ओर बढ़ने लगा। इसे देखकर हनुमान जी ने क्रोध में आकर अपनी गदा से समुद्र को रोकने का प्रयास किया। तब समुद्र ने क्षमा मांगी और विनती की कि उसे नियंत्रित करने के लिए हनुमान जी वहीं रह जाएं।
हनुमान जी ने समुद्र की यह विनती स्वीकार कर ली और वहीं स्थापित हो गए। उन्होंने अपने पवित्र आसन से समुद्र को नियंत्रित रखना शुरू किया।
बेड़ी हनुमान की स्थापना
लेकिन समय के साथ, समुद्र के उग्र रूप को देखते हुए पुरी के लोगों को भय हुआ कि कहीं हनुमान जी समुद्र को छोड़कर अन्यत्र न चले जाएं। इसलिए उन्होंने हनुमान जी की मूर्ति को लोहे की बेड़ियों से बांध दिया। तब से, इस मंदिर को "बेड़ी हनुमान" के नाम से जाना जाता है।
आज का महत्व
आज भी पुरी के लोग और तीर्थयात्री इस मंदिर में आकर हनुमान जी की पूजा करते हैं। उनका विश्वास है कि बेड़ी हनुमान समुद्र को नियंत्रित कर पुरी के लोगों की रक्षा करते हैं। मंदिर में भगवान की मूर्ति को लोहे की बेड़ियों में जकड़ा हुआ देखा जा सकता है, जो इस कथा की सत्यता को प्रमाणित करता है।
यह कथा हमें सिखाती है कि संकट चाहे कितना भी बड़ा क्यों न हो, श्रद्धा और समर्पण से हर समस्या का समाधान संभव है। भगवान हनुमान की अडिग शक्ति और भक्तों की भक्ति ने पुरी नगरी को न केवल संरक्षित किया बल्कि उसे एक पवित्र तीर्थस्थान के रूप में भी स्थापित किया।
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प्रभू जगन्नाथ जी सच्ची कहानी
प्रभु जगन्नाथ जी की आध्यात्मिक जीवन कहानी:
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एक समय की बात है, ओडिशा के पुरी में, एक भक्त था जिसका नाम था माधव। वह प्रभु जगन्नाथ जी का बहुत बड़ा भक्त था और हमेशा उनकी पूजा करता था।
एक दिन, माधव को एक सपना आया जिसमें प्रभु जगन्नाथ जी ने उसे बुलाया और कहा, "माधव, मैं तुम्हारी भक्ति से प्रसन्न हूँ। तुम्हारी इच्छा क्या है?"
माधव ने कहा, "प्रभु, मैं तुम्हारी सेवा करना चाहता हूँ और तुम्हारे चरणों में रहना चाहता हूँ।"
प्रभु जगन्नाथ जी ने कहा, "माधव, तुम्हारी इच्छा पूरी होगी। तुम मेरे मंदिर में रहो और मेरे भक्तों की सेवा करो।"
माधव ने प्रभु जगन्नाथ जी की आज्ञा का पालन किया और मंदिर में रहकर भक्तों की सेवा करना शुरू किया। वह हमेशा प्रभु जगन्नाथ जी की पूजा करता था और उनकी कृपा से अपने जीवन को सफल बनाया।
इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि अगर हम प्रभु जगन्नाथ जी की भक्ति करते हैं और उनकी आज्ञा का पालन करते हैं, तो वे हमें अपनी कृपा से अपने जीवन को सफल बनाने में मदद करते हैं।
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