यह रहा आपकी कहानी "अम्ल वर्षा: सर्वाइवर" के लिए एक इमेज! यह एक भविष्य के भारत के शहर को दिखाता है, जहाँ जहरीली अम्ल वर्षा हो रही है, और एक नैनो-टेक सूट पहने सर्वाइवर खड़ा है।
अम्ल वर्षा: सर्वाइवर इन इंडिया
प्रस्तावना
साल 2047। जलवायु परिवर्तन ने पृथ्वी का स्वरूप बदल दिया था। भारत के प्रमुख शहरों में जहरीली अम्ल वर्षा (Acid Rain) होने लगी थी। बारिश की हर बूंद त्वचा को जला सकती थी, इमारतों को गला सकती थी, और जीवन को नष्ट कर सकती थी। सरकार ने 'रेड ज़ोन' घोषित कर दिए थे, जहाँ रहना नामुमकिन था। लेकिन कुछ लोग अभी भी वहाँ फंसे हुए थे…
अध्याय 1: मौत की बारिश
मुंबई। बारिश की बूंदें सड़कों पर गिरते ही धुआं उठने लगता था। लोग अब बिना स्पेशल सूट के बाहर नहीं निकल सकते थे। 22 वर्षीय आदित्य वर्मा, जो एक वैज्ञानिक का बेटा था, रेड ज़ोन में फंसा हुआ था। उसके माता-पिता दो साल पहले इस अम्लीय तबाही के शिकार हो चुके थे।
आदित्य को सिर्फ एक ही उम्मीद थी— "इनोवेक्स-47" नाम का एक प्रोजेक्ट, जिसे उसके पिता ने शुरू किया था। यह एक विशेष नैनो-टेक्नोलॉजी आधारित सूट था, जो न सिर्फ अम्ल वर्षा से बचाता, बल्कि हवा को भी फिल्टर करता था। लेकिन यह सूट अधूरा था और इसका आखिरी कंपोनेंट बेंगलुरु के सीक्रेट लैब में था।
अध्याय 2: सफर की शुरुआत
आदित्य अपने दोस्त रिया मेहता के साथ रेड ज़ोन से निकलने की योजना बनाता है। रिया एक पूर्व सैनिक थी, जिसने अम्ल वर्षा के शुरुआती दिनों में कई लोगों को बचाया था। उनके पास एक पुरानी लेकिन मॉडिफाइड SUV थी, जिसे उन्होंने खुद एसिड-रेसिस्टेंट बनाया था।
लेकिन मुश्किल यह थी कि रास्ते में "ब्लैक स्कॉर्पियन्स" नाम का एक गिरोह सक्रिय था। ये लोग बचे हुए संसाधनों को लूटते और कमजोर लोगों को मार डालते थे।
अध्याय 3: जाल में फंसे
आदित्य और रिया बेंगलुरु की ओर बढ़ रहे थे, जब उनका सामना ब्लैक स्कॉर्पियन्स से हुआ। उन्हें एक बंद फैक्ट्री में छिपना पड़ा। लेकिन उनके पास सिर्फ 12 घंटे थे, क्योंकि एक और अम्लीय तूफान आने वाला था।
आदित्य ने अपने पिता के लैपटॉप से एक पुरानी कोडेड मैप निकाली, जिसमें एक सीक्रेट अंडरग्राउंड टनल का जिक्र था। यह टनल सीधे बेंगलुरु के रिसर्च सेंटर तक जाती थी।
अध्याय 4: विज्ञान बनाम विनाश
रिया और आदित्य टनल में दाखिल हुए, लेकिन वहां हवा भी जहरीली थी। मास्क और ऑक्सीजन टैंक के सहारे वे आगे बढ़े। अंततः वे लैब तक पहुंचे, लेकिन वहां का सुरक्षा सिस्टम एक्टिव था।
आदित्य ने लैब का सिस्टम हैक करके अंदर घुसने की कोशिश की, लेकिन तभी ब्लैक स्कॉर्पियन्स भी वहां पहुंच गए। गोलियां चलीं, और एक विस्फोट के कारण लैब का आधा हिस्सा ढह गया।
रिया गंभीर रूप से घायल हो गई, लेकिन आदित्य ने आखिरी कंपोनेंट हासिल कर लिया। उसने सूट को पूरा किया और उसे पहन लिया। अब वह अम्ल वर्षा से प्रभावित नहीं हो सकता था।
अध्याय 5: नया युग
आदित्य ने रिया को बचाने के लिए सूट का पहला टेस्ट किया। उसने पाया कि यह न केवल उसे सुरक्षा देता है, बल्कि हवा को भी शुद्ध कर सकता है।
अब उसके सामने एक बड़ा मिशन था— इस टेक्नोलॉजी को बची हुई मानवता तक पहुंचाना।
क्या आदित्य इस जहरीली दुनिया को बचा पाएगा?
क्या वह ब्लैक स्कॉर्पियन्स को हरा पाएगा?
या फिर इंसानियत का अंत निश्चित था?

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