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Showing posts from January 5, 2025

Rudravatar

New Post नीचे लिखे गए हर एक अवतार की कथा पढ़ने के लिए 🔗 लिंक दिया गया है। इससे आप छूं कर पढ़ सकते हैं अथवा Home Page पर जाके पढ़ सकते हैं। 🌼🙏🌼 Devon ke Dev Mahadev ka Rudra Avatar हिंदू धर्म के पौराणिक ग्रंथों के अनुसार, रुद्र भगवान शिव का उग्र और विनाशकारी रूप है। वे रुद्र के रूप में सभी भयों और कष्टों को समाप्त करने वाले हैं। शिव पुराण, महाभारत, और अन्य ग्रंथों में ग्यारह रुद्रों (एकादश रुद्र) का उल्लेख मिलता है। इन ग्यारह रुद्रों का वर्णन और नाम निम्नलिखित हैं: ग्यारह रुद्र अवतार 1. कपाली यह भगवान शिव का उग्र रूप है, जो मृत्यु और विनाश का प्रतिनिधित्व करता है। यह रूप ब्रह्मांड के अंत और पुनर्निर्माण का प्रतीक है।  🔗 यहां से आगे पढ़ें... 2. पिंगल यह रुद्र स्वरूप सौम्य और क्रोध के बीच संतुलन बनाता है। यह सृष्टि के संचालन और ऊर्जा का प्रतीक है।  🔗 यहां से आगे पढ़ें... 3. भीम यह रुद्र का प्रचंड और वीर रूप है। यह धर्म की रक्षा के लिए अधर्म का नाश करता है।  🔗 यहां से आगे पढ़ें... 4. वीरुपाक्ष तीन नेत्रों वाला यह रुद्र ब्रह्मांडीय दृष्टि और ज्ञान का प्रतीक है। ...

ब्लैक कॉर्डेक्स: अनंत का द्वार

New Post अंतिम अध्याय: नई शुरुआत डॉ. माया और रैना ने अमेज़न को फिर से जीवन और ऊर्जा से भरने का बीड़ा उठाया। उन्होंने "अमेज़न ऊर्जा संरक्षक" के रूप में एक नई प्रणाली विकसित की, जो जंगल की शक्ति को संरक्षित करते हुए उसके प्राकृतिक संतुलन को बनाए रखती है। उनकी इस पहल से पृथ्वी पर पर्यावरणीय संकट को रोकने की दिशा में एक नई उम्मीद जगी। दूसरी ओर, अकीरा और केल्विन ने शेष ब्लैक कॉर्डेक्स के प्रभावों को समाप्त करने के लिए पृथ्वी के विभिन्न हिस्सों की यात्रा शुरू की। उन्होंने प्राचीन स्थलों और ऊर्जा स्रोतों को फिर से सक्रिय करते हुए, पृथ्वी को उसकी खोई हुई शक्ति लौटाने का काम किया। स्पेक्ट्रा, जो ब्रह्मांडीय संतुलन की प्रहरी बन चुकी थी, ने अन्य ग्रहों की ओर कदम बढ़ाया। वह जानती थी कि केवल पृथ्वी ही नहीं, बल्कि पूरे ब्रह्मांड को इस संतुलन की आवश्यकता है। उसकी यात्राएं उसे अनजान सितारों और नए खतरों की ओर ले गईं। लेकिन क्या यह सच में अंत था? जब सेलेस्टियल गेट बंद हुआ, एक रहस्यमय संदेश पूरे ब्रह्मांड में गूंजा: “हर अंत एक नई शुरुआत है। ब्लैक कॉर्डेक्स केवल एक चरण था।” यह संदेश न केवल डॉ. म...

Kaliyug

New Post Kaliyug  कलयुग का नाटकिए रूपांतरण  कलियुग के लक्षण: हिंदू धर्म के अनुसार, चार युगों (सतयुग, त्रेतायुग, द्वापरयुग, और कलियुग) में कलियुग सबसे अशांत और अधर्मयुक्त युग है। इसमें: सत्य और धर्म का ह्रास होगा। मनुष्य स्वार्थी, क्रूर और भौतिक सुखों में लिप्त हो जाएगा। पाप, हिंसा, असत्य, लोभ, और अधर्म प्रबल होंगे। समाज में दुष्ट और अत्याचारी शासकों का वर्चस्व होगा। ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र अपने कर्तव्यों से भटक जाएंगे। श्रीमद्भागवत पुराण के अनुसार, जब धरती पाप और अधर्म के बोझ से त्रस्त हो जाएगी, तब भगवान विष्णु कल्कि के रूप में अवतरित होंगे। COMEING SOON..…. Subscribe my Blog story 🙏

Dashavatar Rahashya 10

New Post कल्कि अवतार कथा  कल्कि अवतार हिंदू धर्म में विष्णु के दसवें और अंतिम अवतार के रूप में वर्णित है, जो कलियुग के अंत में प्रकट होंगे। यह अवतार अधर्म, पाप और अन्याय को समाप्त करने और धर्म व सत्य की पुनर्स्थापना के लिए होगा। कल्कि अवतार की कथा के प्रमुख बिंदु इस प्रकार हैं: 1. कलियुग का अंत: वर्तमान में चल रहा समय कलियुग है, जो अधर्म, पाप और नैतिक पतन से भरा हुआ है। जब यह युग अपने चरम पर पहुँचेगा और मानवता पूरी तरह से धर्म से विमुख हो जाएगी, तब भगवान विष्णु कल्कि के रूप में प्रकट होंगे। 2. घोड़े पर सवार अवतार: भगवान कल्कि को सफेद घोड़े (देवदत्त) पर सवार और हाथ में तेज़ तलवार लिए हुए दर्शाया गया है। यह प्रतीक है कि वे अधर्म का संहार करेंगे और दुष्टों का नाश करेंगे। 3. पुत्र के रूप में अवतरण: श्रीमद्भागवत पुराण और अन्य धर्मग्रंथों में उल्लेख है कि भगवान कल्कि का जन्म विष्णु यशा और सुमति के पुत्र के रूप में उत्तर प्रदेश के शंभल नामक गाँव में होगा। 4. अधर्म का नाश: भगवान कल्कि पाप, अन्याय और अधर्म को नष्ट करेंगे। वे दुष्ट राजाओं और अत्याचारियों का अंत करेंगे, जिन्होंने पृथ्वी को अस...

Dashavatar Rahashya 9

New Post बुद्ध अवतार कथा भगवान बुद्ध हिंदू धर्म के दशावतारों में नौवें अवतार माने जाते हैं। वे सत्य, अहिंसा, और करुणा के प्रतीक हैं। उनके जीवन और शिक्षाओं ने न केवल भारत बल्कि पूरी दुनिया को प्रेरित किया। उनके अवतार को भगवान विष्णु का अंश माना जाता है, जो धर्म की पुनर्स्थापना और जीवों को अज्ञान व पाखंड से मुक्त करने के लिए पृथ्वी पर आए। बुद्ध का जीवन परिचय भगवान बुद्ध का जन्म 563 ईसा पूर्व लुंबिनी (वर्तमान नेपाल) में शाक्य वंश के राजा शुद्धोधन और रानी माया के पुत्र के रूप में हुआ। उनका जन्म नाम सिद्धार्थ गौतम था। कहा जाता है कि उनकी माता को सपने में एक सफेद हाथी ने दर्शन दिया था, जो इस बात का प्रतीक था कि उनका पुत्र असाधारण होगा। सिद्धार्थ का पालन-पोषण अत्यंत समृद्धि और विलासिता में हुआ, लेकिन उन्होंने संसार की असली पीड़ा का अनुभव तब किया, जब उन्होंने वृद्धावस्था, रोग, और मृत्यु को देखा। सत्य की खोज और बुद्धत्व की प्राप्ति संसार की पीड़ा को देखकर सिद्धार्थ ने 29 वर्ष की आयु में घर-बार, पत्नी (यशोधरा), और पुत्र (राहुल) का त्याग कर संन्यास ले लिया। सत्य की खोज में उन्होंने कई वर्षों तक त...

Romatic sunday

New Post आर्यन और सिया पहली बार कॉलोनी के सामूहिक पिकनिक में मिलते हैं। वहीं दूसरी तरफ विवेक और आशा का पहली बार आमना-सामना कॉलोनी की स्वास्थ्य जांच शिविर में होता है। दोनों जोड़ी धीरे-धीरे दोस्त बनते हैं और उनकी दोस्ती प्यार में बदलने लगती है। भाग 2: कॉलोनी का रंगीन जीवन श्रीमान और श्रीमती वर्मा हमेशा सबको एकजुट रखने की कोशिश करते हैं। उनकी पहल पर रविवार को कॉलोनी के पार्क में एक "रोमांटिक नाइट" का आयोजन होता है, जहां आर्यन और सिया के बीच प्यार का इजहार होता है। उसी दौरान विवेक और आशा के बीच की गलतफहमी खत्म हो जाती है।