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समय यात्रा: महाभारत से लौटने के बाद

 


 समय यात्रा: महाभारत से लौटने के बाद


भाग 10: समय के प्रभाव


डॉ. आर्यन वर्मा वापस तो लौट आए थे, लेकिन महाभारत काल की यात्रा ने उनके मन पर गहरी छाप छोड़ी थी। वह अब भी कुरुक्षेत्र के युद्ध की विभीषिका और कृष्ण की शिक्षाओं को याद करते रहते। उनके अनुभव ने उन्हें यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि क्या समय की यात्रा ने उनके युग को प्रभावित किया है।


कुछ हफ्तों बाद, आर्यन ने महसूस किया कि उनकी दुनिया में कुछ चीजें बदल गई थीं। ऐतिहासिक ग्रंथों और पुरानी घटनाओं में वे बातें दर्ज थीं, जिन्हें उन्होंने महाभारत काल में देखा था। यह स्पष्ट था कि उनके वहां जाने से समय-रेखा पर सूक्ष्म प्रभाव पड़ा था।


भाग 11: एक नया रहस्य


एक दिन, आर्यन की प्रयोगशाला में एक अजीब घटना घटी। समय पोर्टल, जिसे उन्होंने बंद कर दिया था, अपने आप सक्रिय हो गया। पोर्टल से एक अजीब सी ध्वनि सुनाई दी और फिर एक चमकदार आकृति प्रकट हुई। वह आकृति किसी मानव जैसी थी, लेकिन वह भविष्य की तकनीक से सुसज्जित थी।


उसने कहा, "डॉ. आर्यन, मैं भविष्य से आया हूं। तुम्हारी यात्रा ने समय के प्रवाह को बदल दिया है। अब कई युग एक-दूसरे से टकरा रहे हैं। यदि इसे रोका नहीं गया, तो समय का संतुलन टूट जाएगा।"


आर्यन ने घबराते हुए पूछा, "तुम कौन हो? और यह सब क्या हो रहा है?"

आकृति ने जवाब दिया, "मैं काल प्रहरी हूं। मैं समय के संतुलन की रक्षा करता हूं। लेकिन तुम्हारे हस्तक्षेप ने एक नया संकट खड़ा कर दिया है। तुम्हें फिर से यात्रा करनी होगी, लेकिन इस बार समाधान के लिए।"


भाग 12: समय का टूटता चक्र


आर्यन को फिर से पोर्टल के माध्यम से महाभारत काल लौटना पड़ा। लेकिन इस बार, समय वहां पहले जैसा नहीं था। कुरुक्षेत्र का युद्ध स्थगित हो चुका था। अर्जुन और दुर्योधन के बीच कुछ घटनाएं ऐसी हो रही थीं, जो ग्रंथों में दर्ज नहीं थीं।


कृष्ण ने आर्यन को देखकर गंभीरता से कहा, "तुम्हारा वापस आना इस चक्र को और जटिल बना सकता है। लेकिन यदि समय का प्रवाह ठीक नहीं हुआ, तो यह संपूर्ण ब्रह्मांड को प्रभावित करेगा।"


आर्यन ने समझाया कि वह यहां केवल संतुलन बहाल करने आया है। कृष्ण ने उसे एक दिव्य उपकरण—कालचक्र रत्न—दिया, जो समय की धारा को स्थिर कर सकता था।


भाग 13: विराट का प्रकट होना


जैसे ही आर्यन ने कालचक्र रत्न का उपयोग करने की योजना बनाई, एक नई चुनौती सामने आई। एक शक्तिशाली योद्धा, जिसे विराट कहा जाता था, प्रकट हुआ। विराट ने खुद को "समय का शासक" घोषित किया और कहा, "यह युग अब मेरा है। मैं समय को अपनी इच्छा के अनुसार मोड़ूंगा।"


आर्यन और विराट के बीच एक भयंकर संघर्ष हुआ। विराट समय के नियमों को तोड़ने में कामयाब हो रहा था, लेकिन आर्यन ने अपनी बुद्धिमत्ता और कृष्ण की शिक्षा का उपयोग करके उसे मात दी।


भाग 14: समय का संतुलन बहाल


आर्यन ने कालचक्र रत्न को सही स्थान पर स्थापित किया, जिससे समय की धारा फिर से स्थिर हो गई। विराट गायब हो गया, और महाभारत की घटनाएं अपनी मूल दिशा में लौट आईं। कृष्ण ने आर्यन से कहा, "तुमने अपनी जिम्मेदारी पूरी कर दी है। अब समय तुम्हें जाने की अनुमति देता है।"


भाग 15: अंतिम विदाई


महाभारत काल से लौटते समय, आर्यन ने कृष्ण से पूछा, "भगवान, क्या मैं वास्तव में समय को बदलने का हकदार था?"

कृष्ण मुस्कुराए और बोले, "समय और कर्म एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। तुम्हारा कार्य समय के प्रवाह का हिस्सा था। लेकिन याद रखना, जो बीत गया उसे बदलने का प्रयास मत करना, और जो आने वाला है, उसे स्वीकार करना सीखो।"


भाग 16: वर्तमान में नई शुरुआत


आर्यन ने वर्तमान में लौटकर समय यात्रा पर शोध पूरी तरह बंद कर दिया। उन्होंने इस तकनीक को नष्ट कर दिया और अपने अनुभवों को एक पुस्तक के रूप में लिखा। वह पुस्तक दुनिया को यह समझाने के लिए थी कि समय के साथ छेड़छाड़ केवल विनाश ला सकती है।


लेकिन उनके मन में एक सवाल हमेशा बना रहा—क्या विराट वास्तव में नष्ट हो गया था? या वह किसी और समय-रेखा में वापस आने की योजना बना रहा था?


समाप्त (या फिर से एक नई शुरुआत?)


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