समय यात्रा: अनंत यात्रा
भाग 12: समय का रहस्यमयी संदेश
अरविंद ने खुद को एक नई दुनिया में पाया। यह स्थान शांत था, लेकिन वहां की हवा में कुछ अलग-सी गूँज थी। वह समझ गया कि यह उसकी मूल समय-रेखा नहीं थी, लेकिन यह भी जानता था कि उसने समय को बचाने के लिए अपना कर्तव्य पूरा किया है।
लेकिन तभी, हवा में एक अजीब सी ऊर्जा का कंपन हुआ। एक चमकदार orb (गोलाकार ऊर्जा) उसके सामने प्रकट हुआ और एक गहरी आवाज सुनाई दी:
"तुमने समय को स्थिर कर दिया, लेकिन हर क्रिया का एक परिणाम होता है। एक और खतरा तुम्हारी ओर बढ़ रहा है।"
अरविंद ने घबराते हुए पूछा, "कौन हो तुम? और ये नया खतरा क्या है?"
आवाज ने उत्तर दिया, "मैं कालचक्र हूं, समय का संतुलन। जो तुमने किया, वह सराहनीय है, लेकिन कुछ लोग ऐसे हैं जो समय के इस बदलाव का दुरुपयोग करना चाहते हैं। वे समय के मूल तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं। तुम्हें उन्हें रोकना होगा।"
भाग 13: समय यात्रा का द्वार
कालचक्र ने अरविंद को एक नया उपकरण दिया—एक समय-द्वार, जिसे केवल अरविंद ही खोल सकता था। यह उपकरण उसे समय की किसी भी रेखा में ले जा सकता था, लेकिन इसका इस्तेमाल बहुत सोच-समझकर करना था।
अरविंद ने सुभद्रा और डॉ. ईशान को ढूंढने का फैसला किया, क्योंकि वह जानता था कि इस खतरे से अकेले निपटना आसान नहीं होगा। उसने समय-द्वार का उपयोग किया और खुद को 2150 में पाया। लेकिन यह 2150 पहले जैसा नहीं था—यहां समय पूरी तरह से टूट चुका था।
भाग 14: काल विद्रोही
इस भविष्य में उसे पता चला कि कुछ विद्रोही, जिन्हें "काल यात्री" कहा जाता था, समय का नियंत्रण अपने हाथ में लेने की कोशिश कर रहे थे। उनका नेता, विराट, एक जीनियस वैज्ञानिक था, जिसने समय को अपनी इच्छानुसार मोड़ने की तकनीक विकसित कर ली थी।
विराट का मानना था कि समय को स्थिर करना मानवता की प्रगति को रोकता है। उसने कहा, "समय का बहाव नैतिकता से नहीं, बल्कि शक्ति से तय होना चाहिए।"
अरविंद ने विराट से सामना करने का फैसला किया, लेकिन वह जानता था कि यह लड़ाई सिर्फ ताकत की नहीं, बल्कि बुद्धि और संयम की होगी।
भाग 15: समय का युद्ध
अरविंद ने सुभद्रा और डॉ. ईशान को ढूंढ लिया। उन्होंने मिलकर एक योजना बनाई। उनकी योजना थी समय-द्वार का उपयोग करके विराट को उस क्षण में ले जाना, जहां समय का मूल फिर से खुल सके।
एक भयंकर संघर्ष हुआ। विराट ने अपनी सेना के साथ समय को तोड़ने की कोशिश की, लेकिन अरविंद, सुभद्रा, और डॉ. ईशान ने उसे रोकने के लिए अपनी पूरी ताकत लगा दी। अंत में, अरविंद ने समय-द्वार का उपयोग किया और विराट को एक स्थिर समय-रेखा में फंसा दिया।
भाग 16: अंतिम बलिदान
लेकिन इस लड़ाई ने समय-द्वार को इतना कमजोर कर दिया कि वह टूटने के कगार पर था। अगर वह टूटता, तो सभी समय-रेखाएं हमेशा के लिए खत्म हो जातीं।
अरविंद ने निर्णय लिया कि वह स्वयं को इस समय-द्वार के भीतर समर्पित कर देगा, ताकि इसे स्थिर रखा जा सके। उसने सुभद्रा से कहा, "यह मेरी जिम्मेदारी है। समय को बचाने के लिए मैंने इसे चुना था, और मैं इसे पूरा करूंगा।"
सुभद्रा ने उसे रोकने की कोशिश की, लेकिन अरविंद ने मुस्कुराते हुए कहा, "समय हमें बार-बार चुनौतियां देता है। लेकिन यह हमारा कर्तव्य है कि हम इसे संभालें।"
भाग 17: अनंत शांति
अरविंद ने खुद को समय-द्वार के भीतर समर्पित कर दिया। द्वार स्थिर हो गया, और सभी समय-रेखाएं फिर से संतुलित हो गईं।
सुभद्रा और डॉ. ईशान ने अरविंद की इस बलिदानी कहानी को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने का प्रण किया। उन्होंने समय यात्रा पर काम करना बंद कर दिया और इसे हमेशा के लिए छिपा दिया।
समाप्ति
अरविंद अब भले ही समय के भीतर खो चुका था, लेकिन उसका नाम हमेशा के लिए इतिहास और भविष्य की हर समय-रेखा में अमर हो गया।
(यह वास्तव में अंत है, लेकिन समय के साथ कहानियां कभी खत्म नहीं होतीं।)

Comments
Post a Comment