जंगल जर्नी: रहस्यमयी यात्रा
अंधेरी रात का सन्नाटा, चारों ओर गहरी हरियाली और रहस्यमयी जंगल की हवा। पाँच दोस्तों - अंशुल, आर्या, मिहिर, तान्या और विवेक ने एक ट्रेकिंग प्लान बनाया। वे जंगल की गहराईयों में एक प्राचीन रहस्यमयी मंदिर देखने निकले थे, जिसके बारे में कहा जाता था कि वहाँ अब तक जो भी गया, कभी लौटकर नहीं आया।
जंगल में प्रवेश
सूरज ढल चुका था, और उनके सामने घना जंगल था। हवा में एक अजीब सी गंध थी, जो उन्हें असहज कर रही थी। जंगल का प्रवेश द्वार लकड़ी के पुराने फाटक से घिरा था, जिस पर किसी प्राचीन भाषा में कुछ लिखा हुआ था। विवेक ने हंसते हुए कहा, "यहाँ डरने की कोई बात नहीं, ये सब कहानियाँ हैं।"
लेकिन तान्या को कुछ महसूस हुआ, जैसे कोई उनकी परछाई देख रहा हो।
पहली घटना
अंदर पहुँचने के कुछ समय बाद, उनकी टॉर्च अचानक बंद हो गई। चारों तरफ घुप अंधेरा छा गया। आर्या ने अपना फोन निकाला, लेकिन कोई सिग्नल नहीं था। तभी झाड़ियों से सरसराहट की आवाज आई। सबने देखा कि झाड़ियों के पीछे कुछ हलचल हो रही थी। अंशुल ने हिम्मत करके झाड़ी में झाँका, लेकिन वहाँ कुछ नहीं था।
रहस्यमय संकेत
चलते-चलते उन्हें जमीन पर अजीब निशान दिखे, जैसे किसी बड़े जानवर के पंजे। निशान मंदिर की दिशा में जा रहे थे। लेकिन निशान के साथ-साथ खून की बूंदें भी थीं।
तान्या ने कहा, "हमें वापस जाना चाहिए। ये जगह ठीक नहीं लग रही।"
लेकिन मिहिर ने कहा, "हम इतनी दूर आ चुके हैं, अब वापस जाना बेकार होगा।"
मंदिर का खौफ
आधी रात को वे मंदिर पहुंचे। मंदिर जर्जर अवस्था में था, लेकिन उसकी दीवारों पर खून से अजीब चित्र बने थे। जैसे ही उन्होंने मंदिर के अंदर कदम रखा, दरवाजा अपने आप जोर से बंद हो गया। अब उनके पास कोई रास्ता नहीं बचा था।
मंदिर के अंदर एक गहरी खाई थी, और उसमें से किसी के चिल्लाने की आवाजें आ रही थीं। आवाजें अस्पष्ट थीं, लेकिन उनमें दर्द साफ झलक रहा था।
रहस्यमय किताब और छाया
मंदिर के केंद्र में एक पुरानी किताब रखी थी, जिसमें प्राचीन मंत्र लिखे थे। जैसे ही मिहिर ने किताब को छुआ, अचानक एक छाया उनके सामने प्रकट हुई। वो छाया किसी इंसान की तरह दिख रही थी, लेकिन उसकी आँखें चमक रही थीं।
"तुमने इस जगह को अपवित्र कर दिया," छाया की गूंजती हुई आवाज ने सबको स्तब्ध कर दिया।
भागने की कोशिश
सबने वहां से भागने की कोशिश की, लेकिन दरवाजा खुल ही नहीं रहा था। तान्या ने अपने दुपट्टे से किताब को ढक दिया, तभी मंदिर में हलचल तेज हो गई। छाया जोर-जोर से चिल्लाने लगी और अंत में गायब हो गई।
किताब को छूने के बाद अंशुल को समझ आया कि वो दरवाजा तभी खुलेगा जब किताब को वापस खाई में डाल दिया जाएगा।
अंतिम निर्णय
सबने मिलकर खाई के पास जाकर किताब को नीचे फेंक दिया। तभी एक तेज रोशनी आई और मंदिर का दरवाजा खुल गया।
वे जैसे-तैसे बाहर निकले और जंगल से भाग निकले। लेकिन उनकी ये यात्रा कभी न भूलने वाली थी।
रहस्य बना रहा
वापस लौटने के बाद, उन्होंने उस जंगल और मंदिर के बारे में अधिक जानने की कोशिश की। लेकिन वह मंदिर अब किसी भी नक्शे में नहीं दिखा।
शायद, यह जंगल उन्हें हमेशा याद रखने वाला था।
To be continued this series part 2

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