जंगल का प्रतिशोध
जंगल से लौटने के बाद, अंशुल, आर्या, मिहिर, तान्या और विवेक की जिंदगी सामान्य होनी चाहिए थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। उन पांचों को ऐसा महसूस होने लगा जैसे कोई उन्हें लगातार देख रहा हो। हर जगह छायाएं नजर आतीं, हवा में वही जंगल की अजीब गंध, और कभी-कभी कानों में मंदिर की खौफनाक आवाजें गूंज उठतीं।
अशुभ संकेत
सबसे पहले तान्या को सपने में वही मंदिर दिखने लगा। हर रात वह एक ही सपना देखती – गहरी खाई, खून से सने पंजों के निशान और अंधेरे में चमकती आँखें। एक दिन उसने आर्या को बताया, लेकिन आर्या ने इसे केवल डर का असर कहकर टाल दिया।
मिहिर, जो सबसे बहादुर माना जाता था, अब सबसे ज्यादा डरा हुआ था। उसे लगता था कि कोई अजनबी उसकी परछाई में छिपा हुआ है। एक रात, उसने अपनी दीवार पर खून से बने वही अजीब निशान देखे, जो जंगल में थे।
रहस्यमयी घटना
अंशुल ने ऑनलाइन उस जंगल और मंदिर के बारे में जानने की कोशिश की। उसे एक पुराने स्थानीय इतिहासकार से संपर्क मिला। जब उसने उस इतिहासकार से बात की, तो उसने बताया,
"वह मंदिर किसी सामान्य जगह का हिस्सा नहीं है। वह एक श्रापित भूमि है, जहां जाने वाले लोगों को एक विशेष कीमत चुकानी पड़ती है।"
इतिहासकार ने बताया कि मंदिर के खजाने की रक्षा करने के लिए एक प्राचीन पुजारी ने अपनी आत्मा बलिदान कर दी थी। अब वह आत्मा किसी को भी उस जगह से कुछ लेकर जाने नहीं देती।
अंशुल को याद आया कि उन्होंने किताब को खाई में फेंक दिया था, लेकिन क्या वे सच में कुछ और लेकर लौटे थे?
विवेक का गायब होना
एक रात, विवेक अचानक गायब हो गया। उसकी जगह कमरे में बस एक जला हुआ निशान था, जो ठीक उसी खाई जैसा था। पुलिस ने विवेक को ढूंढने की कोशिश की, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला।
विवेक के गायब होने के बाद, बाकी दोस्तों को समझ में आया कि वह मंदिर अब उन्हें कभी चैन से जीने नहीं देगा।
जंगल की ओर वापसी
अंशुल ने सबको समझाया कि उन्हें वापस जंगल जाना होगा। हो सकता है, वह आत्मा उनसे बदला लेना चाहती हो। डर और अनिश्चितता के बावजूद, वे चारों उसी जंगल की ओर रवाना हुए।
जंगल पहले जैसा ही रहस्यमयी था। वे धीरे-धीरे मंदिर तक पहुंचे। लेकिन इस बार मंदिर का दरवाजा पहले से खुला था, और अंदर गहरी खामोशी थी।
आत्मा का सामना
जैसे ही वे अंदर पहुंचे, वे फिर से उसी छाया से मिले। छाया ने गुस्से में कहा,
"तुमने यहाँ से केवल किताब नहीं, मेरी शांति भी छीन ली।"
अंशुल ने हिम्मत जुटाकर पूछा, "हमसे क्या गलती हुई? हम यहाँ से कुछ लेकर नहीं गए।"
छाया ने जवाब दिया, "तुमने इस जगह का अपमान किया। केवल तुम्हारे आत्मसमर्पण से ही यह श्राप खत्म हो सकता है।"
बलिदान का फैसला
आर्या ने हिम्मत करके छाया से पूछा, "क्या एक व्यक्ति के बलिदान से बाकी की जिंदगी बच सकती है?"
छाया ने हामी भरी।
मिहिर ने सबकी ओर देखा और कहा, "मैं इसके लिए तैयार हूं। मैं ही वह किताब उठाने वाला पहला व्यक्ति था। ये मेरी गलती थी।"
श्राप का अंत
मिहिर ने खाई की ओर कदम बढ़ाए और उसमें छलांग लगा दी। जैसे ही उसने बलिदान दिया, मंदिर की दीवारें कांपने लगीं, और छाया गायब हो गई। दरवाजा खुल गया, और बाकी तीनों ने बाहर की ओर दौड़ लगाई।
शांति, लेकिन कीमत के साथ
मंदिर हमेशा के लिए गायब हो चुका था। तान्या, अंशुल और आर्या ने अपनी जिंदगी में कभी उस जंगल का नाम भी नहीं लिया। लेकिन मिहिर का बलिदान हमेशा उनकी यादों में जिंदा रहा।
हालांकि अब सब शांत था, लेकिन वे जानते थे कि कुछ रहस्य हमेशा के लिए अनसुलझे ही रहने चाहिए।
To be continued this series part 3
👉 आगे चलें एक नई कहानी कीऔर.....
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