समय यात्रा: अतीत और भविष्य की गूँज
भाग 1: रहस्यमयी घड़ी
अरविंद एक सामान्य कॉलेज छात्र था, जो विज्ञान और तकनीक में गहरी रुचि रखता था। वह अक्सर किताबों में खोया रहता, विशेष रूप से समय यात्रा और विज्ञान-कथाओं के बारे में। एक दिन, जब वह अपने दादा के पुराने सामानों की सफाई कर रहा था, तो उसे एक अजीब-सी घड़ी मिली। घड़ी के डायल पर समय के अलावा अजीब-से संकेत और अक्षर अंकित थे।
"दादाजी, ये घड़ी कैसी है?" उसने उत्सुकता से पूछा।
दादाजी ने मुस्कुराते हुए कहा, "ये घड़ी तुम्हारे परदादा की है। उन्होंने इसे बहुत संभालकर रखा था, लेकिन इसे कभी चलाने की कोशिश मत करना।"
अरविंद की जिज्ञासा और बढ़ गई। उसने रात को घड़ी का गहन निरीक्षण किया। अचानक, जब उसने डायल को घुमाया, तो एक नीली रोशनी चारों ओर फैल गई, और वह बेहोश हो गया।
भाग 2: अतीत की ओर
जब अरविंद को होश आया, तो उसने खुद को 1947 में स्वतंत्रता संग्राम के बीचों-बीच पाया। लोग "भारत माता की जय" के नारे लगा रहे थे। अरविंद को समझ नहीं आया कि यह कैसे संभव है। वह यह देखकर हैरान था कि इतिहास के पन्नों में पढ़े हुए नेता उसके सामने खड़े थे।
वहां उसे एक महिला मिली, जिसका नाम सुभद्रा था। सुभद्रा ने उसे एक जासूस समझा और उसकी मदद करने से इनकार कर दिया। लेकिन जब अरविंद ने अपनी परिस्थिति समझाई, तो सुभद्रा ने उसे अपने गुप्त ठिकाने पर ले जाकर छिपाया।
भाग 3: भविष्य की गूँज
अरविंद ने महसूस किया कि घड़ी सिर्फ अतीत में ही नहीं, बल्कि भविष्य में भी यात्रा करवा सकती है। उसने डायल को फिर से घुमाया और इस बार वह 2150 में पहुंच गया। वहाँ की दुनिया तकनीकी रूप से इतनी उन्नत थी कि मनुष्यों और रोबोटों में अंतर करना मुश्किल था।
भविष्य में उसे पता चला कि इस घड़ी का इस्तेमाल गलत हाथों में पड़ने पर बड़े विनाश का कारण बन सकता है। वहाँ के एक वैज्ञानिक, डॉ. ईशान, ने उसे चेताया कि यह घड़ी एक "टाइमलूप" पैदा कर सकती है, जिससे समय और वास्तविकता दोनों टूट सकते हैं।
भाग 4: समय की रक्षा
अरविंद ने तय किया कि वह इस घड़ी को हमेशा के लिए नष्ट कर देगा। लेकिन इसके लिए उसे अतीत, वर्तमान और भविष्य के बीच कई बार यात्रा करनी पड़ी। सुभद्रा और डॉ. ईशान ने उसकी हर मोड़ पर मदद की।
वह अंततः एक ऐसे बिंदु पर पहुँचा, जहाँ समय और स्थान दोनों स्थिर थे। घड़ी को नष्ट करते ही, समय यात्रा का यह चक्र समाप्त हो गया। अरविंद अपने समय में लौट आया, लेकिन वह जानता था कि उसने समय के साथ जो किया, वह उसकी जिंदगी का सबसे बड़ा रहस्य बनकर रहेगा।
भाग 5: नई शुरुआत
अरविंद अब एक वैज्ञानिक बन चुका था। उसने समय यात्रा के सिद्धांतों पर एक किताब लिखी, लेकिन घड़ी का जिक्र कभी नहीं किया। उसकी कहानी एक चेतावनी और प्रेरणा दोनों थी—कि समय को समझना हमारी सबसे बड़ी जिम्मेदारी है।

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