अम्ल वर्षा: सर्वाइवर (भाग 4) – नई दुनिया
अध्याय 16: नया सवेरा
टेराफॉर्मिंग डिवाइस के एक्टिवेट होते ही जहरीली हवाएँ धीरे-धीरे साफ होने लगीं। आकाश में पहली बार सूरज की किरणें दिखीं। अम्ल वर्षा बंद हो गई, और वातावरण में ऑक्सीजन स्तर बढ़ने लगा।
आदित्य, रिया, और कबीर ने बंकर से बाहर आकर देखा—धरती फिर से जीवंत होने लगी थी। पेड़-पौधे सूख चुके थे, लेकिन हवा अब उतनी जहरीली नहीं थी। यह दुनिया अब भी बर्बाद थी, लेकिन इसमें फिर से जीवन की संभावना थी।
अध्याय 17: सफर प्रोजेक्ट का रहस्य
सफर प्रोजेक्ट के वैज्ञानिक अब भी बंकर में छिपे हुए थे। जब आदित्य और उसकी टीम अंदर पहुँची, तो उन्हें एक चौंकाने वाली सच्चाई पता चली—
सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में टेराफॉर्मिंग डिवाइसेज़ लगाए गए थे।
लेकिन बाकी दुनिया में वे अब भी निष्क्रिय थे।
"हमने भारत के लिए तो हल निकाल लिया, लेकिन अगर पूरी दुनिया को बचाना है, तो हमें बाकी डिवाइसेज़ को भी चालू करना होगा," डॉ. अनीश राठी, सफर प्रोजेक्ट के प्रमुख वैज्ञानिक ने कहा।
अध्याय 18: वैश्विक मिशन
अब टीम के सामने एक नया मिशन था—दुनिया के बाकी हिस्सों में बचे हुए लोगों को खोजकर, उन्हें बचाना और बाकी टेराफॉर्मिंग डिवाइसेज़ को ऑन करना।
लेकिन यह इतना आसान नहीं था।
- कई जगहों पर ज़हरीले तूफान और अम्ल वर्षा अब भी हो रही थी।
- कुछ गिरोह अब भी टेक्नोलॉजी पर कब्जा जमाने की कोशिश कर रहे थे।
- कुछ जगहों पर नए, अज्ञात जीव विकसित हो चुके थे, जो अब इस जहरीले वातावरण में पनप चुके थे।
अध्याय 19: दुनिया की ओर पहला कदम
आदित्य, रिया, और कबीर अब एक नई दुनिया की ओर बढ़ने के लिए तैयार थे। उनके पास था—
- इनोवेक्स-47 नैनो-सूट,
- एक उन्नत बख्तरबंद वाहन,
- सफर प्रोजेक्ट का पूरा डेटा,
- और सबसे जरूरी—नई उम्मीद।
उनका पहला गंतव्य था—दुबई का एक गुप्त अंडरग्राउंड बंकर, जहाँ एक और टेराफॉर्मिंग डिवाइस निष्क्रिय पड़ी थी।
क्या वे वहाँ तक पहुँच पाएंगे?
क्या बाकी दुनिया भी बच पाएगी?
या फिर कोई और बड़ा खतरा उनका इंतजार कर रहा था?

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