भाग 20: गुलाब का रहस्य
प्रीति की खिड़की पर हर रात लाल गुलाब मिलने की बात कॉलोनी में चर्चा का विषय बन गई। सभी को लगा कि यह कबीर की शरारत है, लेकिन कबीर लगातार इंकार करता रहा।
एक रात, कबीर ने प्रीति के कमरे के बाहर छिपकर निगरानी करने का फैसला किया। आधी रात के बाद, ठंडी हवा चली, और अचानक उसने देखा कि सफेद साड़ी में वही महिला धीरे-धीरे खिड़की की ओर बढ़ रही है।
कबीर ने हिम्मत करके पूछा,
"अब तुम क्या चाहती हो?"
महिला मुस्कुराई और बोली,
"तुम मुझे गलत समझ रहे हो। मैं यहां किसी को डराने नहीं, बल्कि एक संदेश देने आई हूं।"
कबीर ने हैरानी से पूछा,
"कैसा संदेश?"
महिला ने धीरे से कहा,
"कॉलोनी में जो रिश्ते और प्यार है, उसे बचाना और बढ़ाना मेरा उद्देश्य है। यह गुलाब उसी प्यार का प्रतीक है। लेकिन अब यह जिम्मेदारी तुम सबकी है।"
भाग 21: कॉलोनी का नया संकल्प
महिला की बात सुनकर कबीर ने पूरी कॉलोनी को यह बात बताई। सबने मिलकर फैसला किया कि वे इस कॉलोनी को एक ऐसा परिवार बनाएंगे, जहां हर कोई एक-दूसरे के साथ खड़ा रहेगा।
रघु ने अपने "सब्जी और मुस्कान" स्टॉल पर एक नया बोर्ड लगाया:
"प्यार और दोस्ती की मंडी में सबका स्वागत है!"
नंदिता आंटी ने कहा,
"यह कॉलोनी सच में खास है। यहां डर भी प्यार में बदल जाता है।"
प्रीति ने हंसते हुए कबीर से कहा,
"अब तो तुम भी हर रोज मुझे एक गुलाब दोगे, सही?"
कबीर ने शरारत भरे अंदाज में कहा,
"सिर्फ एक गुलाब? तुम्हारे लिए तो पूरी बगिया हाजिर है।"
अंतिम संदेश:
कॉलोनी की कहानी केवल हंसी और रोमांच की नहीं, बल्कि उन अद्भुत भावनाओं की है जो लोगों को जोड़ती हैं। चाहे रहस्य हो, डर, या प्यार—सबने मिलकर इसे यादगार बना दिया।
शायद यही हर कॉलोनी की सच्ची कहानी होती है—जहां हर घर एक अध्याय है, और हर दिन एक नई शुरुआत।
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