विलोहित: रुद्र का रक्तवर्णी और प्रचंड स्वरूप
विलोहित भगवान शिव का वह रुद्र रूप है जो रक्तवर्णी (लाल रंग) का प्रतीक है। यह स्वरूप शक्ति, क्रोध, और संघर्ष का प्रतिनिधित्व करता है। विलोहित का उद्देश्य अधर्म, असत्य, और अन्याय का नाश करना है। यह रूप भगवान शिव के उग्र और युद्धकारी स्वभाव का द्योतक है, जो सृष्टि में संतुलन बनाए रखने के लिए विनाशकारी रूप धारण करता है।
विलोहित का शास्त्र सम्मत वर्णन
शिव महापुराण और रुद्र संहिता में विलोहित स्वरूप का उल्लेख मिलता है। विलोहित का नाम उनके रक्तवर्णी तेजस्वी स्वरूप के कारण पड़ा। यह स्वरूप भगवान शिव की क्रोध और शक्ति का प्रतीक है, जिसे अधर्म और अन्याय के विनाश के लिए धारण किया गया।
कथा:
सृष्टि के आरंभिक काल में, जब दैत्यों और असुरों का अत्याचार बढ़ गया था, और देवता, ऋषि, और मानव असहाय हो गए, तब उन्होंने भगवान शिव की आराधना की।
असुर "क्रोधासुर" ने अपनी तपस्या से ब्रह्मा जी से वरदान प्राप्त किया था कि उसे कोई भी देवता या मानव परास्त नहीं कर सकता। वरदान के प्रभाव से उसने तीनों लोकों में अधर्म और अराजकता फैला दी।
देवताओं की प्रार्थना सुनकर भगवान शिव ने अपनी तीसरी आंख खोली और उसमें से एक रक्तवर्णी प्रचंड रूप प्रकट हुआ। यह स्वरूप "विलोहित" के नाम से प्रसिद्ध हुआ। विलोहित के क्रोध से संपूर्ण ब्रह्मांड कांप उठा।
विलोहित ने अपनी अग्निमय शक्ति और प्रचंड क्रोध से क्रोधासुर और उसकी सेना का संहार किया। उनका रक्त पृथ्वी पर गिरते ही पवित्र गंगा में समाहित हो गया, जिससे पृथ्वी पवित्र हो गई। इस प्रकार विलोहित ने अधर्म का नाश कर धर्म की स्थापना की।
विलोहित का संदेश
विलोहित का स्वरूप यह सिखाता है कि जब अधर्म अपनी सीमा पार कर लेता है, तब न्याय और धर्म की रक्षा के लिए संघर्ष और विनाश आवश्यक हो जाता है। यह स्वरूप साहस, शक्ति, और सत्य के प्रति अडिग रहने का प्रतीक है।
आराधना और महत्व
विलोहित की आराधना से व्यक्ति को नकारात्मकता और भय से मुक्ति मिलती है। यह स्वरूप साहस और आत्मबल का संचार करता है।
विलोहित को समर्पित मंत्र:
1. "ॐ विलोहिताय नमः।"
2. "ॐ रुद्राय विलोहिताय घोराय नमः।"
पूजा का फल
भय और बाधाओं का नाश होता है।
अन्याय और अधर्म का सामना करने का साहस मिलता है।
जीवन में ऊर्जा और सकारात्मकता का संचार होता है।
विलोहित स्वरूप हमें सिखाता है कि धर्म की रक्षा के लिए संघर्ष आवश्यक है, और शक्ति का उपयोग हमेशा न्याय और सत्य की रक्षा के लिए होना चाहिए।
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