कहानी यहीं खत्म नहीं हुई। शादी के बाद भी कॉलोनी में हलचल बनी रही, और हर किरदार की जिंदगी में एक नया अध्याय खुला।
भाग 11: कॉलोनी की नई शुरुआत
शादी के कुछ हफ्तों बाद कॉलोनी में चर्चा थी कि रघु अब एक "फूल और सब्जी सेंटर" खोलने की तैयारी कर रहा है। उसने अपनी दुकान के लिए एक बड़ा बोर्ड लगवाया:
"प्यार के फूल और स्वाद की सब्जियां—रघु स्पेशल"।
कबीर ने यह देखकर मजाक में कहा,
"रघु, अब तुमने रोमांस और सब्जी दोनों बेचने का ठेका ले लिया है।"
रघु ने हंसते हुए जवाब दिया,
"भाई, प्यार और पेट का रिश्ता गहरा है। दोनों को खुश रखना पड़ता है।"
भाग 12: विवेक और आशा की शादी
विवेक और आशा की शादी भी धूमधाम से हुई। इस बार आर्यन और सिया ने खुद पूरी तैयारी का जिम्मा संभाला। शादी के दिन आशा ने मजाक में कहा,
"अगर ये शादी भी कॉलोनी की शादी की तरह मस्तीभरी नहीं हुई, तो मैं नाराज हो जाऊंगी।"
नंदिता आंटी ने यह सुनकर चुटकी ली,
"यहां हर शादी में मजाक और प्यार का तड़का लगता है, चिंता मत करो।"
शादी के दौरान कबीर और प्रीति ने मिलकर एक डांस परफॉर्मेंस दी, जो सबसे बड़ी हिट रही।
भाग 13: कबीर और प्रीति की कहानी
कबीर और प्रीति, जो हमेशा बहस में उलझे रहते थे, अचानक एक-दूसरे के करीब आने लगे। एक दिन प्रीति ने कबीर से पूछा,
"तुम्हें इतना मजाक करना जरूरी क्यों लगता है?"
कबीर ने गंभीरता से कहा,
"क्योंकि तुम्हारी हंसी मुझे सबसे ज्यादा पसंद है।"
इसके बाद प्रीति ने कोई जवाब नहीं दिया, लेकिन उनकी मुस्कान ने सब कुछ बयां कर दिया।
भाग 14: कॉलोनी का त्योहार
कुछ महीनों बाद कॉलोनी ने मिलकर एक बड़े त्योहार का आयोजन किया। इस बार यह तय हुआ कि हर परिवार एक विशेष डिश बनाएगा। आर्यन और सिया ने साथ मिलकर एक "स्पेशल केक" बनाया। विवेक और आशा ने "पंजाबी थाली" बनाई, और रघु ने अपनी "फूलों वाली सब्जी" का स्टॉल लगाया।
त्योहार के अंत में नंदिता आंटी ने कहा,
"इस कॉलोनी में प्यार और दोस्ती का रिश्ता इतना गहरा है कि हर दिन यहां एक त्योहार जैसा लगता है।"
अंतिम संदेश:
कॉलोनी का सफर खुशी, दोस्ती, और हंसी-मजाक से भरा रहा। यह कहानी सिर्फ शादी और त्योहारों की नहीं, बल्कि उन खूबसूरत रिश्तों की है जो हर छोटे पल को खास बना देते हैं।
और रघु? उसने अपनी दुकान का नाम बदलकर "सब्जी और मुस्कान" रख दिया, क्योंकि यहां हर कोई खुशियों की फसल बोता था।
भाग 15: भूतिया रोमांस की शुरुआत
शादी के बाद की खुशियों के बीच, कॉलोनी में अजीबोगरीब घटनाएं होने लगीं। रात में किसी के कदमों की आवाजें सुनाई देतीं, और कभी-कभी फूलों की गंध हवा में फैल जाती। रघु, जो अब अपनी नई दुकान खोल चुका था, सबसे पहले इन घटनाओं का शिकार हुआ।
एक रात वह अपनी दुकान बंद कर रहा था, तभी उसने महसूस किया कि कोई उसके पीछे खड़ा है। मुड़कर देखा, तो एक सफेद साड़ी में एक महिला खड़ी थी। उसकी आंखों में गहरी उदासी थी।
रघु डरते हुए बोला,
"क-क-कौन हो तुम?"
महिला ने धीरे से कहा,
"मैं राधा हूं। मुझे फूल बहुत पसंद हैं। क्या तुम मुझे गुलाब दोगे?"
रघु ने कांपते हुए उसे गुलाब का एक गजरा थमा दिया। महिला ने मुस्कुराते हुए कहा,
"धन्यवाद। लेकिन मेरी कहानी यहीं खत्म नहीं होती। मैं हर रात यहां आऊंगी।"
भाग 16: कॉलोनी की जासूसी
रघु ने अगले दिन पूरी कॉलोनी को यह बात बताई। पहले तो सबने इसे उसका मजाक समझा, लेकिन जब श्रीमती वर्मा ने भी रात में किसी को अपने आंगन में चलते देखा, तो सभी सतर्क हो गए।
कबीर ने तुरंत योजना बनाई:
"हम सब मिलकर इस भूतिया रहस्य को सुलझाएंगे। आज रात हम सभी पार्क में इकट्ठा होंगे।"
रात होते ही कॉलोनी के सभी लोग पार्क में इकट्ठा हो गए। जैसे ही आधी रात हुई, ठंडी हवा चलने लगी, और सफेद साड़ी वाली वही महिला दिखाई दी।
भाग 17: राधा की कहानी
महिला ने अपनी कहानी सुनाई:
"मैं राधा हूं। सालों पहले, मैं इसी कॉलोनी में रहती थी। मेरी शादी वाले दिन एक दुर्घटना हो गई, और मैं अपने दूल्हे तक नहीं पहुंच पाई। तब से मैं अपनी अधूरी शादी को पूरा करने के लिए भटक रही हूं।"
आर्यन ने पूछा,
"तो अब आप क्या चाहती हैं?"
राधा ने कहा,
"मुझे बस इतना चाहिए कि मेरी शादी की रस्में पूरी करवा दो। मैं किसी को नुकसान नहीं पहुंचाऊंगी।"
भाग 18: भूतिया शादी का आयोजन
विवेक और आशा ने आगे आकर कहा,
"हम आपकी शादी करवाने में मदद करेंगे।"
राधा ने खुशी से स्वीकार किया। पूरी कॉलोनी ने मिलकर एक अनोखी शादी की योजना बनाई। पार्क को सफेद और लाल फूलों से सजाया गया, और रघु ने खासतौर पर "भूतिया गुलाब" का इंतजाम किया।
शादी की रात राधा का दूल्हा, जो अब आत्मा बन चुका था, भी प्रकट हुआ। दोनों की शादी पूरी हुई, और दोनों आत्माएं एक-दूसरे का हाथ पकड़कर आसमान की ओर चली गईं।
भाग 19: नए रहस्य की दस्तक
कॉलोनी की शांति वापस लौट आई। लेकिन कुछ दिनों बाद, कबीर ने देखा कि प्रीति के कमरे की खिड़की पर हर रात एक लाल गुलाब रखा होता है।
प्रीति ने हंसकर कहा,
"कबीर, यह तुम्हारा मजाक है न?"
कबीर हैरान होकर बोला,
"मैंने कुछ नहीं किया!"
अब सवाल उठने लगे—क्या राधा की कहानी सच में खत्म हुई, या यह किसी नई कहानी की शुरुआत है?
जारी रहेगा…

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