पार्क में उत्सव का माहौल धीरे-धीरे और रंगीन होता गया।
अचानक, नंदिता आंटी ने अपने पुराने रेडियो को चालू किया, और एक पुराना रोमांटिक गाना बजने लगा। हर कोई संगीत की धुन पर झूमने लगा। श्रीमान वर्मा ने कहा, "यह गाना तो हमारी शादी के समय का है!" और श्रीमती वर्मा को नाचने के लिए खींच लिया।
आर्यन ने सिया को अपने पास खींचते हुए कहा, "अब तुम्हें नाचना ही पड़ेगा, यह हमारी शुरुआत का जश्न है।" दोनों ने डांस फ्लोर पर सबका ध्यान खींच लिया।
विवेक ने भी मौका नहीं छोड़ा और आशा से कहा, "अब तो डॉक्टर बनने की जरूरत नहीं है, आपकी मुस्कान ही मेरी दवा है।" यह सुनकर आशा की हंसी रुक ही नहीं रही थी।
प्रीति और कबीर ने भी डांस में शामिल होकर माहौल को और खुशनुमा बना दिया। इस बीच, रघु ने ठेले पर चाय और पकौड़े की व्यवस्था कर दी, जिससे सबकी खुशी दुगुनी हो गई।
पार्क में लगे पेड़ों पर जगमगाती लाइटें और हवा में तैरती खुशबू ने इस शाम को जादुई बना दिया। सभी ने एक साथ ग्रुप फोटो खिंचवाया, जिसमें हंसी और प्यार के रंग साफ झलक रहे थे।
समाप्ति में...
श्रीमान वर्मा ने घोषणा की, "यह रोमांटिक संडे हर साल मनाया जाएगा, ताकि प्यार और मस्ती के ये पल हमेशा हमारी यादों में ताजा रहें।"
सबने एकसाथ कहा, "यह हमारी सबसे यादगार शाम है!"
और इस तरह, पार्क की रोशनी धीमी होने लगी, लेकिन वहां मौजूद हर दिल में खुशी और प्यार की चमक हमेशा के लिए बस गई।
रोमांटिक संडे के अगले दिन...
सुबह होते ही पार्क में एक नया हलचल शुरू हुआ। श्रीमान वर्मा ने घोषणा की कि पार्क को अब "प्रेम वाटिका" के नाम से जाना जाएगा, और हर महीने एक विशेष आयोजन होगा, जिसमें लोग अपनी कहानियां साझा करेंगे।
आर्यन और सिया ने पार्क के कोने में एक छोटी सी बेंच पर "हमारी पहली मुलाकात" नाम का प्लैक लगवा दिया। यह देखकर विवेक ने मजाक किया, "अगर हर कोने पर प्लैक लगने लगे तो पार्क में चलने की जगह ही नहीं बचेगी।"
आशा ने तुरंत कहा, "चलने की जगह नहीं रहेगी, लेकिन प्यार की कहानियां हमेशा रहेंगी।" विवेक ने शरारत भरी मुस्कान के साथ जवाब दिया, "तो अगला प्लैक हमारा होगा!"
नंदिता आंटी ने एक नई योजना बनाई—एक "प्यार की दीवार," जहां लोग अपने संदेश और यादें लिख सकें। रघु ने सबसे पहले दीवार पर लिखा, "सब्जियां सस्ती हों या महंगी, प्यार की कीमत नहीं लगती।"
प्रीति और कबीर ने "प्रेम वाटिका" में एक छोटा सा गार्डन विकसित करने का प्रस्ताव रखा, जहां हर जोड़े का एक पौधा लगाया जाएगा। इस पर सिया ने कहा, "हमारा पौधा गुलाब का होगा, क्योंकि यह हमारे प्यार की निशानी है।"
अगले कुछ हफ्तों में...
पार्क में चहल-पहल बढ़ने लगी। हर कोई अपने रिश्तों को और मजबूत बनाने के लिए नए-नए तरीकों से योगदान दे रहा था। विवेक और आशा ने मिलकर एक "मुफ्त हेल्थ चेकअप कैंप" का आयोजन किया।
श्रीमान वर्मा ने मजाक में कहा, "अब मुझे भी ब्लड प्रेशर चेक करवाना पड़ेगा, ताकि श्रीमती वर्मा मुझसे ज्यादा न डराएं।"
समाप्ति की ओर...
पार्क अब सिर्फ एक जगह नहीं, बल्कि खुशियों का केंद्र बन गया था। हर रविवार, "प्रेम वाटिका" में कोई न कोई नई कहानी जुड़ती।
और इस तरह, "रोमांटिक संडे" का असर हर दिन महसूस होने लगा। यह सिर्फ एक शाम की याद नहीं रही, बल्कि प्यार और रिश्तों को जीने की एक नई शुरुआत बन गई।
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भाग 5: प्यार से विवाह की ओर
"रोमांटिक संडे" के बाद कॉलोनी में हलचल मच गई। आर्यन और सिया की सगाई के बाद से कॉलोनी के हर कोने में बस यही चर्चा थी—शादी कब होगी?
श्रीमान वर्मा, जो हमेशा कुछ नया करने की फिराक में रहते थे, ने कॉलोनी की मीटिंग बुला ली।
"हम इस शादी को ग्रैंड इवेंट बनाएंगे!" उन्होंने ऐलान किया।
"लेकिन पैसा कहां से आएगा?" श्रीमती वर्मा ने सवाल उठाया।
"कॉलोनी फंड से, और थोड़ा रघु से सब्जियों की महंगाई कम करवा देंगे!" उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा।
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भाग 6: तैयारियों का धमाल
शादी की तारीख तय होते ही पूरी कॉलोनी में उत्साह का माहौल बन गया।
आर्यन और सिया की शादी की शॉपिंग
सिया, जो फैशन डिजाइनर थी, अपने लिए परफेक्ट ड्रेस चुनने में जुट गई। आर्यन इस दौरान पूरी तरह से कनफ्यूज था।
"सिया, ये चौथा शोरूम है! क्या तुम्हें कोई ड्रेस पसंद नहीं आ रही?" आर्यन ने झल्लाते हुए कहा।
"शादी जिंदगी का सबसे खास दिन है, इसे परफेक्ट होना चाहिए," सिया ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया।
विवेक और आशा का साइड प्लान
उधर, विवेक और आशा ने तय किया कि वे आर्यन और सिया की शादी के दिन अपनी शादी की घोषणा करेंगे।
"डबल धमाका होगा," आशा ने शरारती अंदाज में कहा।
"लेकिन मेरी पब्लिक स्पीकिंग खराब है," विवेक ने घबराते हुए कहा।
"डॉक्टर हूं, दिल संभाल लूंगी," आशा ने चुटकी ली।
कबीर और प्रीति का भाई-बहन वाला मजाक
कबीर और प्रीति शादी की तैयारी में मदद करने लगे। कबीर ने कहा,
"मैं आर्यन भैया को दूल्हा बनने की ट्रेनिंग दूंगा।"
प्रीति ने तुरंत जवाब दिया, "और मैं सिया दी को बताऊंगी कि दूल्हे को कैसे संभालें!"
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भाग 7: नंदिता आंटी की सलाह
नंदिता आंटी ने शादी से पहले आर्यन और सिया को बुलाया।
"शादी कोई आसान काम नहीं है। प्यार तो फिल्मी है, लेकिन असली रोमांस तो रसोई और बिजली के बिल में होता है," उन्होंने हंसते हुए कहा।
आर्यन और सिया ने सिर हिलाकर आशीर्वाद लिया, लेकिन वे एक-दूसरे को देखकर मुस्कुरा रहे थे।
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भाग 8: शादी का दिन
शादी के दिन पूरी कॉलोनी में उत्सव जैसा माहौल था।
रघु, जो हमेशा सब्जियों की ट्रे लेकर आता था, आज गुलाब के फूल बेच रहा था।
"आज मैं सब्जी छोड़कर रोमांस बेच रहा हूं," उसने मजाक में कहा।
श्रीमान वर्मा ने माइक संभालते हुए कहा,
"शादी का शुभारंभ श्रीमती वर्मा के आदेश पर होगा, और मैं वादा करता हूं कि आज ज्यादा मजाक नहीं करूंगा।"
श्रीमती वर्मा ने जवाब दिया, "तुम्हारा ये वादा भी बाकी वादों की तरह फेल होगा।"
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भाग 9: शादी में ट्विस्ट
जब शादी की रस्में शुरू हुईं, तभी विवेक और आशा ने अपनी शादी की घोषणा कर दी।
"हम दोनों भी शादी कर रहे हैं," विवेक ने थोड़ा झिझकते हुए कहा।
आशा ने तुरंत माइक पकड़ लिया और कहा, "और हम अपनी शादी का रजिस्ट्रेशन अगले हफ्ते करेंगे।"
पूरा पार्क तालियों और हंसी से गूंज उठा।
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भाग 10: नया जीवन, नई शुरुआत
शादी के बाद आर्यन और सिया अपने नए जीवन की शुरुआत करने के लिए तैयार थे।
"अब तो घर के सारे बिल तुम्हारे हिस्से," सिया ने मजाक किया।
"और रसोई का सारा राज तुम्हारे नाम," आर्यन ने जवाब दिया।
विवेक और आशा भी अपनी शादी की तैयारियों में जुट गए। कबीर और प्रीति, जो हमेशा मजाक में उलझे रहते थे, अब दोनों जोड़ियों की मदद करने में लगे थे।
नंदिता आंटी ने अंत में कहा,
"प्यार और शादी में मजा तभी है, जब आप हंसते-हंसते एक-दूसरे का साथ निभाएं।"
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कहानी का अंत:
कॉलोनी का यह मजेदार सफर प्यार, मस्ती, और शादी की खूबसूरत यादों के साथ खत्म हुआ।
और हां, रघु ने आखिरकार अपनी सब्जियों का दाम थोड़ा कम कर दिया!
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